
बलिया। जनपद की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत पूर में चकबंदी प्रक्रिया लंबित होने के कारण हजारों किसानों की फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है, जिससे वे सरकार की विभिन्न योजनाओं से वंचित हो रहे हैं। इस संबंध में सामाजिक कार्यकर्ता एवं ध्रुवजी सिंह स्मृति सेवा संस्थान के सचिव भानु प्रकाश सिंह ‘बबलू’ ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश शासन के 08 अप्रैल 2026 के शासनादेश के अनुसार किसान पहचान पत्र (फार्मर आईडी) को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कृषी उपज की खरीद सहित विभिन्न योजनाओं के लिए अनिवार्य कर दिया गया है। लेकिन ग्राम पंचायत पूर में वर्ष 1982 से चल रही चकबंदी प्रक्रिया के तहत धारा-42 में लंबित मामलों के कारण भूमि अभिलेखों का अद्यतन कार्य आनलाईन नहीं हो सका है।
बताया गया कि तहसील सिकंदरपुर अंतर्गत इस ग्राम पंचायत में लगभग 10 हजार से अधिक चकदार/किसान हैं, जिनके अभिलेख ऑनलाइन अपडेट न होने के कारण वे फार्मर रजिस्ट्री नहीं करा पा रहे हैं। इसके चलते किसान न तो गेहूं को एमएसपी पर बेच पा रहे हैं और न ही प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की आगामी किस्त प्राप्त कर पा रहे हैं। इसके अलावा खाद, बीज एवं अन्य किसान लाभार्थीपरक योजनाओं में भी बाधा उत्पन्न हो रही है, वहीं किसानों के केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) भी नहीं बन पा रहे हैं।
पूर में विशेष शिविर लगाकर समस्या के समाधान की मांग
भानु प्रकाश सिंह ने कहा कि बलिया जनपद के 20 हजार से अधिक किसानो की यह ज्वलंत समस्या पूरी तरह प्रशासनिक एवं तकनीकी कारणों से उत्पन्न हुई है, जिसमें किसानों की कोई गलती नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि चकबंदी प्रभावित क्षेत्रों के किसानों को फार्मर आईडी की अनिवार्यता से अस्थायी छूट दी जाए तथा जब तक अभिलेख ऑनलाइन अपडेट नहीं हो जाते, तब तक किसानों को सभी योजनाओं का लाभ निर्बाध रूप से दिया जाए।
साथ ही उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देशित कर अभिलेखों के शीघ्र डिजिटलीकरण एवं ग्राम पंचायत पूर में विशेष शिविर लगाकर समस्या के समाधान की मांग की है।
ग्राम पूर मे 10 हजार से अधिक चकदार है। ऐसी ही जिले मे दो दर्जन से अधिक गांव चकबंदी प्रक्रियान्तर्गत है। जहां के हजारों किसान इस शासनादेश के कारण तथा चकबंदी गांवो के अभिलेख आनलाईन नही होने फार्मर आईडी नही बनने से सभी लाभार्थीपरक शासकीय योजनाओ से वंचित हो जायेंगे।

