
रोशन जायसवाल,
बलिया। सवाल यह नहीं है कि अखबारों में या सोशल मीडिया पर यह कह देना कि हमारा शहर एक माडल सिटी हो गया है, यह गलत कहा जाएगा, सहीं तब होगा जब हमारे शहर क्षेत्र के प्रमुख जगहों पर चल रहे प्राइवेट स्टैंड को शहर से बाहर कर दिया जाए। उदाहरण के तौर पर रोडवेज के बगल में कांग्रेस भवन के पीछे और बगल में, फ्लाइओवर के नीचे, महुआ मोड मार्ग पर प्राइवेट स्टैंड चल रहे है, यहां बसों की संख्या ज्यादा है, जाम का मुख्य कारण यह भी है।

गड़वार तिराहे पर जाम उस वक्त लगता है जब स्कूली बसें और प्राइवेट बसें, साथ ही सरकारी बसों का आवाजाही एक साथ शुरू हो जाता है तो जाम लग जाता है, और जो थोड़ी जगह बचती है उसमें भी ई-रिक्शा घुस जाता है। अधिकारी मौन है और जनप्रतिनिधि गंभीर नहीं है। चुनाव नजदीक है और नेताओं का पता नहीं। इस शहर को जाम से कैसे मुक्ति मिले।
दृश्य नंबर एक-
सुझाव के रूप में नगरवासियों की मानें तो उनका कहना है कि सिकंदरपुर-बिल्थरारोड की तरफ जाने वाले प्राइवेट वाहनों का स्टैंड बहादुरपुर जीराबस्ती के बीच किया जाए। इससे फायदा यह होगा कि बिल्थरारोड और सिकंदरपुर से आने वाले लोग ई-रिक्शा से शहर में आ सकते है। ऐसे मंें ई-रिक्शा जो शहर में घूमते है वे दूरी लंबी तय करेंगे इससे जाम से राहत मिलेगी।
दृश्य नंबर दो-
गड़वार, नगरा और भीमपुरा की तरफ जाने वाले प्राइवेट वाहनों का स्टैंड मिड्ढा की तरफ हो। इससे फायदा यह होगा कि गड़वार नगरा और भीमपुरा की ओर से आने वाले यात्री ई-रिक्शा से शहर की तरफ आ सकते है। यहां भी ई-रिक्शा वाले अधिक दूरी तय करेंगे जिससे लोगों को जाम से निजात मिलेगी।

दृश्य नंबर तीन-
रसड़ा मऊ, आजमगढ़, गाजीपुर, बनारास और भरौली बक्सर की तरफ जाने वाले प्राइवेट वाहनों का स्टैंड माल्देपुर कर दिया जाए, हालांकि माल्देपुर वाहन स्टैंड है भी लेकिन प्रशासन के आंख में धूल झोंकते हुए चित्तू पांडेय से बहेरी तक प्राइवेट वाहन लगाकर सवारी ढोया जाता है।
दृश्य नंबर चार-
हल्दी बैरिया, मांझी की तरफ जाने वाले वाहनों के लिये प्राइवेट स्टैंड जमुआ तक किया जाए। इससे फायदा यह होगा कि इधर से या उधर से आने जाने वाले ई-रिक्शा से वाहन स्टैंड तक प हुंच सकते है।
यह तभी संभव है जब सीओ सिटी, सिटी मजिस्ट्रेट, लगातार शहर में भ्रमण करेंगे और अनाधिकृत तरीके से चल रहे प्राइवेट वाहनों पर कार्रवाई करेंगे और वाहन चालकों को आवश्यक निर्देश देंगे कि वे शहर क्षेत्र वाहन लेकर न आए।
दृश्य नंबर पांच-
गुदरी बाजार चमन सिंह बाग रोड सुबह से देर शाम तक छोटे बड़े वाहनों से सामान लादने का काम किया जाता है जब कई सारे वाहन शहर में एक साथ निकलते है तो जाम लग जाता है। इससे भी निजात दिलाने की जरूरत है।
दृश्य नंबर छह-
भले ही सरकार यह दावा करती हो कि बलिया में खनन नहीं हो रहा है यदि बलिया में खनन देखना है तो दियारे में रात के वक्त चले जाए जहां लगभग 70 से 80 ट्राली रोजाना दियारे से मिट्टी लेकर शहर में कूच करते है। यह भी एक जाम की समस्या है। हालांकि खनन करने वाले लोग बड़े ही चालाकी से काम करते है ये रात को मिट्टी ढुलाई करते है और शहर की तरफ ले जाते है। इसकी जानकारी पुलिस और प्रशासन दोनों को है लेकिन इसके बावजूद भी कोई कार्रवाई नहीं होती है।

