
बलिया। बाजार में मिठाइयों और खाद्य पदार्थों में मिलावटखोरी का खेल भी तेज हो गया है। रंग-बिरंगी मिठाइयों, खोवा, नमकीन और पेय पदार्थों में कृत्रिम रंगों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार बीती दीपावली पर लिए गए 36 खाद्य पदार्थों के सैंपलों में से 14 की रिपोर्ट खराब आई थी। जांच में पाया गया कि खाद्य पदार्थों को आकर्षक और चटकदार बनाने के लिए जरूरत से ज्यादा रंगों का प्रयोग किया गया था।
विभागीय अनदेखी के कारण जिले के कई स्थानों पर मिलावटी खोवा बनाए जाने का भी आरोप है। वाराणसी, कानपुर, लखनऊ और बिहार से खोवा की खेप बाजार में खप रही है। फुटकर बाजार में स्थानीय खोवा 280 से 300 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है, जबकि बाहर से आने वाला खोवा करीब 100 रुपये तक सस्ता मिल रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार खाद्य पदार्थों में दो प्रकार के रंगों का प्रयोग होता है, कोलतार (खाने योग्य) और प्राकृतिक रंग। खाने की वस्तुओं में केवल सीमित मात्रा में कोलतार रंगों का ही इस्तेमाल करने की अनुमति है, जिनमें लाल, पीला, हरा और नीला प्रमुख हैं। लेकिन मुनाफे के लालच में कई जगह प्रतिबंधित और गैर मानक रंगों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
जानकारों का कहना है कि पिसी हुई लाल मिर्च में भी घुलनशील कोलतार रंग जैसे सूडान-293 मिलाया जाता है, ताकि उसमें मौजूद कूड़ा, कंकड़ या बुरादा छिपाया जा सके। ऐसे में त्योहार के समय लोगों को खाद्य पदार्थ खरीदते समय विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

