
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने गुरुवार को शिक्षा विभाग से जुड़े लाखों कर्मचारियों को बड़ी राहत दी। कैबिनेट बैठक में बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, रसोइयों और अन्य कर्मचारियों के लिए कैशलेस चिकित्सा उपचार योजना पर मुहर लगा दी गई। इस योजना से राज्य भर में लगभग 10 से 15 लाख लाभार्थी (शिक्षक और उनके परिवार) फायदा उठा सकेंगे। इलाज की सीमा 5 लाख रुपये तक होगी, और अस्पताल में नकद भुगतान की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह फैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शिक्षक दिवस पर घोषित योजना को लागू करने का हिस्सा है।
कैबिनेट में कुल 29-30 प्रस्तावों पर मुहर लगी, जिसमें ड्राइविंग लाइसेंस की फेसलेस सुविधा और अन्य विकास परियोजनाएं भी शामिल हैं। लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में शिक्षा क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक फैसला लिया गया। बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह और संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने प्रेस वार्ता में बताया कि कैबिनेट ने बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभागों के तहत आने वाले सभी शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए कैशलेस मेडिकल ट्रीटमेंट स्कीम को मंजूरी दे दी है।
यह योजना राज्य कर्मचारियों की तर्ज पर बनाई गई है और आयुष्मान भारत जैसी व्यवस्था पर आधारित है। लाभार्थियों को पैनल में शामिल अस्पतालों में इलाज पूरी तरह कैशलेस मिलेगाकृयानी अस्पताल में कोई नकद भुगतान नहीं करना होगा, सरकार सीधे खर्च वहन करेगी। इलाज की अधिकतम सीमा 5 लाख रुपये प्रति वर्ष बताई गई है।

