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Ballia : योगी के मंत्रिमंडल में पूर्वांचल के एकमात्र क्षत्रिय चेहरा है दयाशंकर सिंह

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रोशन जायसवाल,
बलिया की राजनीति में दयाशंकर सिंह इसलिए जाने जाते है, क्योकि उनके मामा मैनेजर सिंह द्वाबा के कर्मठ, ईमानदार एवं संघर्षशील नेता रहे है। उनको द्वाबा का मालवीय भी कहा जाता है। लोकनायक जयप्रकाश नारायण एवं पूर्व पीएम चंद्रशेखर के हर आंदोलन में वह कदम से कदम मिलाकर चलते रहे। बलिया में बड़े अदब के साथ पूर्व विधायक मैनेजर सिंह का नाम लेते है। मैनेजर सिंह बलिया नगर के प्रमुख जगहों पर बैठकर जनता की समस्या सुनते थे।

नगर के दीपक होटल पर बैठकर वह जनता दरबार लगाते थे और लोग अपनी फरियाद लेकर पहुंचते थे। वर्तमान समय में पूर्व विधायक मैनेजर सिंह के भांजे दयाशंकर सिंह योगी सरकार में परिवहन मंत्री है। वह योगी सरकार के छह क्षत्रिय मंत्रियों में पूर्वांचल के एकमात्र क्षत्रिय चेहरा है। योगी मंत्रिमंडल के क्षत्रिय चेहरों में फिरोजाबाद जिले से ठाकुर जयवीर सिंह, शाहजहांपुर जिले के जेपीएस ठाकुर, रायबरेली जिले से दिनेश प्रताप सिंह, सहारनपुर जिले से कुंवर बृजेश सिंह, अमेठी जिले से मंकेश्वर शरण सिंह एवं पूर्वांचल के बलिया से दयाशंकर सिंह शामिल है।

मैनेजर सिंह के भांजे दयाशंकर सिंह 38 साल से कर रहे भाजपा की राजनीति
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से की थी राजनीति की शुरूआत
बलिया।
बलिया नगर के विधायक एवं परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने अपनी राजनीति की शुरूआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से की। 1988 में एलटी कालेज से पढ़ाई की। इसके बाद लखनऊ विवि में दाखिला लिया। दयाशंकर सिंह 1997-98 तक छात्रसंघ के महामंत्री रहे। 1998-99 में छात्रसंघ के अध्यक्ष चुने गये। दयाशंकर सिंह 2001 में भाजयुमो के प्रदेश मंत्री बने। 2001 में उनकी शादी हुई। 2002 में वह भाजयुमो के प्रदेश उपाध्यक्ष बने। 2004 में भाजयुमो के राष्ट्रीय मंत्री बने। इसके बाद धर्मेन्द्र प्रधान की टीम में शामिल हुए। 2005 से 2007 तक भाजयुमो के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहे। 2007 में युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बने।
2007 में पहली बार भाजपा से नगर विधानसभा से चुनाव लड़े। 2010 में भाजपा के प्रदेश मंत्री बने। वह 2012 तक इस पद पर रहे। 2016 में प्रदेश उपाध्यक्ष बने। 2015 में पहली बार विधान परिषद का चुनाव लड़े। इस दौरान उनको भाजपा के अलावा 23 अन्य दलों के विधायकों का भी वोट मिला। 2016 में दूसरी बार विधान परिषद का चुनाव लड़े। उस समय भी अन्य दलों के कई विधायकों का उनको वोट मिला। 2016 में बसपा सरकार में मुख्यमंत्री मायावती पर टिप्पणी करने के कारण उन्हें पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया। उनकी गिरफ्तारी बक्सर में हुई थी। जेल से रिहा होने के बाद 2017 के विधानसभा चुनाव में लखनऊ के सरोजनी नगर सीट से उनकी पत्नी स्वाति सिंह को भाजपा से टिकट मिला।
दयाशंकर सिंह ने अपनी पत्नी को जीताने में अहम भूमिका निभायी। स्वाति सिंह के चुनाव जीतने के बाद भाजपा में उनकी वापसी हो गई। पहली बार बनी योगी सरकार में स्वाति सिंह मंत्री बनी। इसके बाद महेन्द्र नाथ पांडेय भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बने। इसमें दयाशंकर सिंह प्रदेश उपाध्यक्ष बने। महेन्द्र नाथ पांडेय के बाद स्वतंत्र देव सिंह प्रदेश अध्यक्ष बने। उनकी टीम में भी वह प्रदेश उपाध्यक्ष रहे। वह 2022 तक प्रदेश उपाध्यक्ष बने रहे। 2022 में दूसरी बार भाजपा ने नगर विधानसभा सीट से दयाशंकर सिंह को टिकट दिया। इसमें वह एक लाख से अधिक मतों से विजयी हुए। बलिया नगर विधानसभा में अब तक इस तरह की विजय किसी ने दर्ज नहीं की है।
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह द्वाबा के मालवीय एवं लगातार कई बार के विधायक मैनेजर सिंह के भांजे है। चूंकि, मैनेजर सिंह द्वाबा के विधायक थे। इसलिए दयाशंकर सिंह ने बलिया में पढ़ाई-लिखाई की और अपना बचपन गुजारा। बता दें कि परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह योगी सरकार में पूर्वांचल के एकमात्र क्षत्रिय चेहरा है। इनका समाज के हर वर्ग में विशेष पकड़ है। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह भले ही यूपी सरकार में मंत्री है, लेकिन उनकी पकड़ पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक है। धार्मिक प्रवृत्ति के दयाशंकर सिंह कई धार्मिक आयोजन भी बलिया में करा चुके है। वह पूर्व पीएम चंद्रशेखर के साथ रहे है।

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