
बलिया। जिले में परिवहन राज्यमंत्री दयाशंकर सिंह और रसड़ा से बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के बीच सियासी तनातनी एक बार फिर तेज हो गई है। दोनों नेता एक-दूसरे पर विकास कार्यों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। सड़क निर्माण से लेकर रसड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के जीर्णाेद्धार तक का मामला अब खुलकर राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है।
एक कार्यक्रम के दौरान परिवहन राज्यमंत्री दयाशंकर सिंह ने बिना नाम लिए रसड़ा विधायक पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके द्वारा कराए जा रहे विकास कार्यों का श्रेय दूसरे लोग लेने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब वह बलिया में विकास की बात करते हैं और उसे कराने का प्रयास करते हैं, तो कुछ लोग अड़ंगा लगाते हैं और दुष्प्रचार शुरू कर देते हैं। पहले विरोध किया गया और अब षड्यंत्र किए जा रहे हैं ताकि जिले में विकास न हो।
दयाशंकर सिंह ने कहा कि कुछ दिन पहले उन्होंने विधानसभा क्षेत्र की एक सड़क के लिए 48 लाख रुपये स्वीकृत कराए थे, लेकिन अब उस सड़क को एक रात में बनवाने का दुष्प्रचार किया जा रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कोई भी अच्छी सड़क एक रात में नहीं बन सकती और ऐसी सड़क कब उखड़ जाएगी, यह कहा नहीं जा सकता। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दुष्प्रचार करने वाले लोग बाद में विभागीय मिलीभगत से भुगतान भी करा लेते हैं।
रसड़ा सीएचसी के मामले पर परिवहन मंत्री ने कहा कि जो अस्पताल सरकारी मद से बन रहे हैं, उनमें वाहवाही लूटने का प्रयास क्यों किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि कोई इतना दानवीर है तो खुद एक अस्पताल बनाकर सरकार को दे दे। साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मिड्ढी से परिखरा तक की सड़क और नाली के लिए 52 करोड़ रुपये मिलने के बावजूद आज तक काम पूरा नहीं कराया गया, ऐसे लोग मुफ्त में क्या निर्माण कराएंगे।
सीएचसी जीर्णाेद्धार आदेश निरस्तीकरण बना विवाद की जड़
दरअसल, पूरा मामला रसड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के जीर्णाेद्धार से जुड़ा है। विधायक उमाशंकर सिंह की पहल पर 24 दिसंबर को मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) द्वारा सीएचसी अधीक्षक मनीष जायसवाल को पत्र जारी किया गया था। इसमें कहा गया था कि सीएस इंफ्रा कंस्ट्रक्शन लिमिटेड द्वारा सीएसआर फंड से रसड़ा सीएचसी का जीर्णाेद्धार किया जाएगा और अधीक्षक की देखरेख में कार्य होगा, ताकि चिकित्सकीय सेवाएं बाधित न हों। इस आदेश की प्रतिलिपि जिलाधिकारी बलिया सहित संबंधित अधिकारियों को भेजी गई थी।
हालांकि, 26 दिसंबर को सीएमओ ने एक और आदेश जारी कर पूर्व में दिए गए आदेश को निरस्त कर दिया। आदेश में कहा गया कि चूंकि इस कार्य का समस्त व्यय संस्था द्वारा स्वयं वहन किया जाएगा और इसके लिए नियमानुसार उच्च स्तर से अनुमति प्राप्त नहीं हुई है, इसलिए पूर्व आदेश को निरस्त किया जाता है। इस निर्णय के बाद गांव के लोगों में नाराजगी देखी जा रही है।
बोले विधायक: कुछ नेता पैर खींचने का काम कर रहे
रसड़ा विधायक उमाशंकर सिंह ने आरोप लगाया कि कुछ नेता जानबूझकर विकास कार्यों में बाधा डाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को यह सवाल सीएमओ से करना चाहिए कि सीएचसी के जीर्णाेद्धार का आदेश क्यों और किसके इशारे पर निरस्त किया गया। विधायक का दावा है कि जब उन्होंने सीएमओ से इस बारे में पूछा तो जवाब मिला कि उन पर बहुत दबाव है, लेकिन वे किसी का नाम नहीं लेना चाहते।
उमाशंकर सिंह ने कहा कि रसड़ा सीएचसी को आधुनिक बनाने की पूरी तैयारी थी। उन्होंने बताया कि वह स्वयं स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ चुके हैं, इसलिए चाहते हैं कि कोई और इस परेशानी से न गुजरे। उनका दावा है कि रसड़ा का सीएचसी पूरे प्रदेश में एक मिसाल बन सकता था, लेकिन राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण यह प्रयास बाधित हो गया।

