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Ballia : मंच पर जीवंत हुई कर्मयोगिनी अहिल्याबाई होल्कर, कलाकारों ने अपने शानदार अभिनय से दर्शकों को झकझोरा

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नाटक के दौरान कभी भावुक हुए दर्शक तो कभी गर्व से सीना चौड़ा हुआ
बलिया।
एक मई को देर शाम गंगा बहुउद्देशीय सभागार में राजमाता अहिल्याबाई होल्कर की जीवन गाथा कर्मयोगिनी का मंचन किया गया। भारतेंदु नाट्य अकादमी लखनऊ एवं संकल्प साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था बलिया की संयुक्त प्रस्तुति कर्मयोगिनी में अहिल्याबाई होल्कर का जीवन संघर्ष, उनकी न्यायप्रियता, दूरदर्शिता एवं धार्मिक और सांस्कृतिक उत्थान के प्रति उनका समर्पण दिखा। नाटक शुरू होने से पहले कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि डॉ सुषमा शेखर, वरिष्ठ कोषाधिकारी आनंद दुबे और जनपद के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ जनार्दन राय ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्य सभा के उपसभापति हरिवंश किन्हीं विशेष कारणों से उपस्थित नहीं हो सके उन्होंने नाटक की सफलता की कामना और संकल्प संस्था के प्रयासों की सराहना करते हुए अपना लिखित संदेश भेजा था जिसे पढ़कर सुनाया गया। विशिष्ट अतिथि डॉ सुषमा शेखर ने कहा कि संकल्प के रंगकर्मियों ने इस नाटक के माध्यम से ना सिर्फ अहिल्याबाई होल्कर के जीवन को मंच पर प्रदर्शित किया बल्कि हमें अपनी महान सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने का अवसर भी प्रदान किया। वरिष्ठ कोषाधिकारी आनन्द दुबे ने अपने संबोधन में कहा कि संकल्प के रंगकर्मियों की जितनी प्रशंसा की जाए कम है। इस नाटक के मंचन से बलिया के रंगमंच को एक नई ऊंचाई मिली है। उन्होंने कहा कि इसका मंचन अधिक से अधिक स्कूलों और कालेजों में होना‌ चाहिए ताकि नई पीढ़ी अपनी विरासत से परिचित हो सके।

नाटक में अहिल्याबाई का दिखाया गया पूरा जीवन
नाटक में दिखाया गया कि एक साधारण परिवार की लड़की मालवा साम्राज्य की बहु बनती है। लेकिन जीवन में सुख नहीं पाती। अपने पति, ससुर और पुत्र के मृत्यु के बाद जब मालवा साम्राज्य की गद्दी संभालती है तो बहुत सारी कठिनाईयां आती है लेकिन अहिल्याबाई उन कठिनाइयों से जूझते हुए ना सिर्फ मालवा साम्राज्य को मजबूत किया बल्कि एक स्त्री का मुखर स्वर बन कर विरोधियों को चुनौती भी दिया।

कई क़िलें, सड़कें, कुँएं और विश्राम गृह बनवाने में योगदान दिया। शिव के इस उपासक ने मुगल काल में क्षतिग्रस्त काशी विश्वनाथ मंदिर का जीर्णाेद्धार करवाने के साथ ही औरंगाबाद के घृष्णेश्वर मंदिर के पुनर्निर्माण में अपना योगदान दिया। अपनी राजधानी महेश्वर के नाम पर कपड़ा उद्योग को बढ़ावा देते हुए माहेश्वरी साड़ियों को जन्म दिया।

नाटक में इन्होंने यह निभाया किरदार
नाटक में अहिल्याबाई की भूमिका में रिया वर्मा और मल्हार राव की भूमिका में राहुल चौरसिया ने शानदार अभिनय किया। इसके अलावा शुभम सिंह, मोनिका गुप्ता, विशाल कुमार, दूधनाथ यादव, रितिक गुप्ता, अभिमन्यु, ओमवीर खरवार, प्रीतम वर्मा, प्रियांशु चतुर्वेदी, बृजेश, मौसम कुमार, जिगर वर्मा, संध्या वर्मा, खुशी, साक्षी जायसवाल, मनीषा गुप्ता, खुशी कुमारी, भाग्यलक्ष्मी, सागर ने भी अपने किरदार को शानदार तरीके से निभाया। मेकअप ट्विंकल गुप्ता, सोनी पाण्डेय, कास्ट्यूम काव्या गुप्ता, लाइट तुषार पाण्डेय, म्यूजिक शिवम कृष्ण, परिकल्पना और सह निर्देशन ट्विंकल गुप्ता का रहा। नाटक के लेखक व निर्देशक वरिष्ठ रंगकर्मी आशीष त्रिवेदी ने सबके प्रति आभार व्यक्त किया। संचालन उमेश सिंह ने किया।

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