
रोशन जायसवाल,
कोलकाता/बलिया। पश्चिम बंगाल की राजनीति में पूर्वांचल की ताकत एक बार फिर चर्चा का विषय बनी। हावड़ा उत्तर विधानसभा क्षेत्र से विधायक और राज्य सरकार के नगर विकास मंत्री उमेश राय ने हाल के विधानसभा चुनाव में अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ का प्रदर्शन किया। चुनाव के दौरान पूर्वांचल और बिहार मूल के मतदाताओं के बीच उनका व्यापक जनसंपर्क चर्चा में रहा।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हावड़ा और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में रहने वाले पूर्वांचल और बिहार के लोगों के बीच उमेश राय को अच्छा समर्थन मिला। इसी दौरान उत्तर प्रदेश के बलिया से पूर्व मंत्री नारद राय भी कोलकाता पहुंचे और चुनाव प्रचार में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने कई जनसंपर्क कार्यक्रमों और बैठकों में हिस्सा लेकर पूर्वांचल समाज से उमेश राय के पक्ष में मतदान की अपील की।
बताया जाता है कि कोलकाता और हावड़ा क्षेत्र में रहने वाले पूर्वांचल समाज के लोगों से नारद राय के पुराने सामाजिक और राजनीतिक संबंध हैं। चुनाव के दौरान इन संपर्कों का लाभ उमेश राय के चुनाव अभियान को मिला। स्थानीय स्तर पर कई सामाजिक संगठनों और प्रवासी पूर्वांचलवासियों ने भी चुनावी माहौल में सक्रिय भागीदारी निभाई।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पश्चिम बंगाल में पूर्वांचल और बिहार मूल के मतदाता कई विधानसभा क्षेत्रों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। ऐसे में इस वर्ग का समर्थन किसी भी उम्मीदवार की चुनावी स्थिति को मजबूत कर सकता है। उमेश राय की जीत को भी इसी सामाजिक समीकरण से जोड़कर देखा जा रहा है।
नगर विकास मंत्री बनने के बाद उमेश राय लगातार शहरी विकास, आधारभूत संरचना और जनसुविधाओं से जुड़े कार्यों को लेकर सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। वहीं, पूर्वांचल समाज के बीच उनकी लोकप्रियता और नारद राय जैसे नेताओं का सहयोग भविष्य की राजनीति में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

