
बलिया। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष/जनपद न्यायाधीश अनिल कुमार झा के आदेश पर रविवार को एडीआर भवन, दीवानी न्यायालय परिसर में पर्यावरण संरक्षण एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन विषयक विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।
शिविर का संचालन राम बिलास प्रसाद और चंद्र प्रकाश तिवारी ने किया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के महत्व के साथ-साथ उनसे जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई।
वक्ताओं ने स्थायी लोक अदालत (परमानेंट लोक अदालत) की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसका उद्देश्य बिजली, पानी, अस्पताल, परिवहन और बीमा जैसी सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं से जुड़े विवादों का त्वरित, सस्ता और प्रभावी समाधान उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि यह सामान्य अदालतों से अलग एक स्थायी निकाय है, जो आपसी सुलह-समझौते के माध्यम से मामलों का निस्तारण करता है। शिविर में बताया गया कि स्थायी लोक अदालत में वाद दायर करने के लिए किसी प्रकार का न्यायालय शुल्क नहीं देना पड़ता। इसके निर्णय सभी पक्षों पर बाध्यकारी होते हैं और इनके विरुद्ध किसी अन्य अदालत में अपील नहीं की जा सकती। साथ ही, यह अदालत एक करोड़ रुपये तक के दावों से संबंधित विवादों का निस्तारण करने में सक्षम है।
कार्यक्रम में विधि के छात्र-छात्राओं समेत बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया और विधिक जानकारी प्राप्त की। अधिकारियों ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक रहने तथा विवादों के समाधान के लिए वैकल्पिक विवाद निस्तारण प्रणाली का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील की।

