
बलिया। करीब 17 बीघा में फैले राजकीय इंटर कॉलेज (जीआईसी) को पहले प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज में शामिल करने की योजना बनी थी। इसी के चलते ‘प्रोजेक्ट अलंकार’ के तहत स्वीकृत 1.5 करोड़ रुपये की धनराशि शासन ने वापस मंगा ली। बाद में संशोधित प्रस्ताव में विद्यालय को मेडिकल कॉलेज से बाहर कर दिया गया, लेकिन तब तक मरम्मत का कार्य ठप हो चुका था।
वर्तमान स्थिति यह है कि विद्यालय की छतें टपक रही हैं और प्रयोगशालाएं खंडहर में तब्दील हो चुकी हैं। लापरवाही के कारण 17 बीघा में फैला परिसर अब सिमटकर करीब 15 बीघा रह गया है। टूटी बाउंड्रीवाल के चलते अराजक तत्वों और नशेड़ियों ने परिसर को अपना ठिकाना बना लिया है।
स्थिति यह है कि डायल-112 की गाड़ी परिसर में खड़ी होने के बावजूद नशेड़ियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा। कभी संसाधनों से भरपूर रहने वाली प्रयोगशालाएं और छात्रावास अब इतने जर्जर हो चुके हैं कि वहां जाना भी जोखिम भरा हो गया है।
1903 में स्थापित जनपद का ऐतिहासिक यह विद्यालय कभी शिक्षा का प्रमुख केंद्र माना जाता था, लेकिन आज यह जर्जर भवन, झाड़-झंखाड़ और नशेड़ियों के अड्डे में बदल चुका है। विडंबना यह है कि मेडिकल कॉलेज की योजना के चलते विद्यालय के जीर्णाेद्धार के लिए स्वीकृत डेढ़ करोड़ रुपये भी वापस हो गए।
पुननिर्माण के लिये शासन को भेजा गया है प्रस्ताव
इस संबंध में जिला विद्यालय निरीक्षक देवेंद्र कुमार गुप्ता ने बताया कि विद्यालय भवन के पुनर्निर्माण के लिए शासन को नया प्रस्ताव भेजा गया है। बजट स्वीकृत होते ही निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। नशेड़ियों की समस्या पर उन्होंने कहा कि प्राचार्य को इस संबंध में लिखित सूचना देनी चाहिए, ताकि आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

