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Ballia : 36 साल पहले रखी गई थी सीवरेज योजना की आधारशिला, अब दयाशंकर सिंह अधूरे कार्य को कर रहे पूरा

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रोशन जायसवाल,
बलिया।
सीवरेज योजना की आधारशिला आज से लगभग 36 साल पहले तत्कालीन नगर विकास मंत्री विक्रमादित्य पांडेय ने करीब 1990 में टाउन हाल के सामने रखी थी। इसके बाद परियोजना पूरी नहीं हो पाई। उसके बाद 2005 में दूसरी बार इस परियोजना का शिलान्यास तत्कालीन नगर विकास मंत्री आजम खां व नगर विकास राज्यमंत्री नारद राय ने किया था। उसके बाद काम तेेजी से शुरू हुआ। करीब 57 किलोमीटर एरिया में सड़क खोदकर सीवरजे की पाइप डाली गई। सपा सरकार जाने के बाद कुछ साल तक काम चला, लेकिन उसके बाद कार्य बंद हो गया।

उसके बाद 2023 में परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने सीवरेज योजना चालू कराने के लिये 71 करोड़ रूपये स्वीकृत कराई जिससे काम चल रहा है। करोड़ों की लागत से छोड़हर में एसटीपी बनकर तैयार हो गया है। उसके अलावा दो पंपिंग स्टेशन, एक कलेक्ट्रेट परिसर में और दूसरा बेदुआ में बनना है। जिसमें कलेक्ट्रेट परिसर में पंपिंग स्टेशन करीब 80 प्रतिशत तक कार्य पूरा हो गया है। इस समय मिड्ढी से लेकर एनसीसी तक कार्य चल रहा है। इसके अलावा जलनिगम ने पूरे शहर में सीवरेज योजना पाइप लाइन का मरम्मत व साफ-सफाई कराया है। जानकारी मिल रही है कि अगस्त माह में योजना शुरू हो जाएगी।

शहर को दो हिस्सों में बांटकर किया जा रहा था कार्य
कार्यदायी संस्था जल निगम (निर्माण खंड) ने शहर को दो हिस्सों सिटी जोन (रेलवे लाईन से दक्षिण) तथा सिविल लाईन जोन (रेलवे लाईन से उत्तर) में बांटकर काम शुरू कर दिया। जल निमग ने पहले सीटी जोन में काम शुरू किया। इस जोन में 5222.72 लाख रूपये की लागत से 28 किलोमीटर तथा 4472.31 लाख रूपया खर्च कर सिविल लाईन जोन में 29.6 किमी पाईप लाईन डाली गयी।
सूत्रों की मानें तो शासन ने इस परियोजना को पूरा करने के लिये साल 2009 को निर्धारित किया था, लेकिन धन के अभाव में समय बढ़ता गया। इस दौरान सीवरेज के इस प्रस्तावित योजना पर खर्च भी करोड़ो रूपये बढ़ गया, परन्तु योजना निर्धारित समय बीतने के बाद पूरा नहीं हो सकी।

भुगतान के दबाव में जेई ने कर ली थी आत्महत्या
जल निगम में काम कराने वाले कुछ दबंग ठकेदारों के फर्जी भुगतान के दबाव में पांच साल पहले जहर खाकर आत्महत्या कर लिया। सीवरेज योजना का काम देख रहे जेई दिनेश पाल ने दो जनवरी 2018 को विषाक्त पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली। उस वक्त चर्चा थी कि कुछ ठेकेदार फर्जी भुगतान का दबाव बना रहे थे। उनसे परेशान होकर जेई ने यह कदम उठाया। हालांकि इसकी जांच नहीं होने से मामला दबा रह गया।

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