
विजय कुमार गुप्ता,
बांसडीह (बलिया)। उत्तर प्रदेश सरकार के नौ वर्ष पूरे होने पर बीते मार्च माह में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पुनीत पाठक के नेतृत्व में सरकार की नीतियों के विरोध में धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया था। इस दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चित्तू पांडे के वंशज जैनेंद्र कुमार पाण्डेय उर्फ मिंटू ने सभा को संबोधित करते हुए स्थानीय विधायक केतकी सिंह पर तीखा कटाक्ष करते हुए भ्रष्टाचार और हर विभाग में उनके दर्जनों प्रतिनिधियों को लेकर बयान दिया था।
इस बयान के बाद बांसडीह क्षेत्र में सियासी पारा गरमा गया। सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच जमकर बयानबाजी हुई। इसी दौरान बांसडीह विधानसभा का सात बार प्रतिनिधित्व कर चुके पूर्व मंत्री स्वर्गीय बच्चा पाठक को लेकर भी अभद्र टिप्पणियां सामने आईं, जिससे विवाद और गहरा गया। इस बयानबाजी को लेकर अब भाजपा डैमेज कंट्रोल में जुटी हुई है। भाजपा नेताओं का कहना है कि पूर्व मंत्री बच्चा पाठक के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणियां भाजपा नेताओं के नाम से बनाए गए फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स के माध्यम से की गई हैं और इसमें पार्टी की कोई भूमिका नहीं है।
विवाद बढ़ने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने स्थिति को संभालने की कोशिश की, लेकिन तब तक सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों के बयान तेजी से वायरल हो चुके थे। वहीं, इस पूरे विवाद में सपा समर्थकों की भी एंट्री हो गई, जिन्होंने सोशल मीडिया पर भाजपा कार्यकर्ताओं को घेरते हुए तीखी प्रतिक्रियाएं दीं।
सोमवार को भाजपा नेता प्रतुल कुमार ओझा ने कोतवाली पहुंचकर कोतवाल प्रवीण कुमार सिंह को एक पत्रक सौंपा और फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि इन फर्जी अकाउंट्स के जरिए ही आपत्तिजनक बयानबाजी की गई, जिससे पार्टी की छवि खराब करने की कोशिश हुई है। भाजपा नेताओं ने स्पष्ट किया कि पार्टी स्वच्छ और मर्यादित राजनीति में विश्वास करती है। अब इस पूरे मामले में पुलिस क्या कार्रवाई करती है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
यह था आरोप
कांग्रेसी नेता जैनेंद्र पाण्डेय ने आरोप लगाया था कि जहां सामान्यतः विधायकों के एक-एक प्रतिनिधि होते हैं, वहीं बांसडीह विधायक के हर विभाग में कई-कई प्रतिनिधि सक्रिय हैं। उन्होंने कहा था कि कोतवाली, तहसील, एसडीएम, लेखपाल, नहर सहित बालू और गिट्टी जैसे कार्यों में भी अलग-अलग प्रतिनिधि मौजूद रहते हैं और कथित रूप से भ्रष्टाचार में सहभागिता कर रहे है।

कौन थे शेर ए बलिया
पूर्व मंत्री स्व. बच्चा पाठक का पचास वर्ष से अधिक की राजनीतिक सफर काफी प्रभावशाली रहा है। उनकी राजनीति की शुरुआत वर्ष 1966 में बलिया जिले के रेवती ब्लॉक प्रमुख बनने के साथ हुई थी। वर्ष 1967 में उन्होंने पहली बार कांग्रेस के टिकट पर बांसडीह विधानसभा से चुनाव लड़ा, हालांकि उस समय उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद 1969 में उन्होंने जीत दर्ज कर विधानसभा में प्रवेश किया और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।
स्व. पाठक ने 1971, 1974, 1977 और 1980 में लगातार जीत दर्ज कर बांसडीह का नेतृत्व किया। खास बात यह रही कि 1977 में जब जनता पार्टी की लहर में कांग्रेस का लगभग सफाया हो गया था, उस समय भी उन्होंने जीत हासिल कर अपनी मजबूत पकड़ का परिचय दिया। इसी के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उन्हें “शेर-ए-बलिया” के नाम से पुकारना शुरू किया।
हालांकि 1984 में उन्हें कांग्रेस से टिकट नहीं मिल सका और 1989 में चुनाव लड़ने के बावजूद उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने 1991 और 1996 में फिर से जीत दर्ज कर कुल सात बार बांसडीह विधानसभा का प्रतिनिधित्व किया, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड माना जाता है।

