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Ballia : होलाष्टक शुरू, मांगलिक कार्य निषेध, तीन मार्च तक रहेगा

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बलिया। होलाष्टक दो शब्दों से मिलकर बना है, होली व अष्टक जिसका अर्थ है आठ दिनों की अवधि। यह फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से लेकर होलिका दहन तक रहता है। होलाष्टक 24 फरवरी से शुरू होकर 3 मार्च तक रहेगा। इस दौरान कोई भी मांगलिक कार्य करना निषेध होता है। होलाष्टक के साथ मौसम परिवर्तन शुरू हो जाता है। सूर्य का प्रकाश तेज होता है। हवायें ठंडी रहती हैं। ऐसे में व्यक्ति रोग की चपेट में आ जाता है। इस समय मन की स्थिति अवसाद ग्रस्त रहती है।


ज्योतिषाचार्य डॉ. अखिलेश कुमार उपाध्याय ने बताया कि होलाष्टक के समय सभी ग्रह उग्र अवस्था में होते हैं। इसलिए इस दौरान जो शुभ कार्य किये जाते हैं, उनका उत्तम फल प्राप्त नहीं होता है। इसलिए मांगलिक कार्य करना निषेध माना जाता है। इस दौरान अष्टमी को चन्द्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल और पूर्णिमा को राहु उग्र स्वभाव में रहते हैं। इन ग्रहों के उग्र होने के कारण मनुष्यों में निर्णय लेने की क्षमता कमजोर हो जाती है।

होलाष्टक में वर्जित कार्य
होलाष्टक में विवाह, गृहप्रवेश, नामकरण, मुंडन संस्कार व नये व्यवसाय की शुरुआत नहीं करनी चाहिये। किसी को क्रोध में कुछ अपशब्द न कहें, क्योंकि यह समय अधिक भावनात्मक और मानसिक संवेदनशीलता का होता है।

होलाष्टक में क्या करें
यह समय भगवान विष्णु व नरसिंह भगवान की पूजा के लिए उत्तम माना जाता है। भगवान नरसिंह की पूजा करें व सूर्य भगवान को जल अर्पित करें। ग्रह दोष शमन के लिए सूर्य की पूजा, हनुमान चालीसा का पाठ करें व तामसिक भोजन न करें।

होलाष्टक को क्यों माना जाता है अशुभ
होलिका दहन से पहले प्रहलाद पर अनेकानेक अत्याचार किये गये थे, जिनकी पीड़ा के कारण इन आठ दिनों को नकारात्मक ऊर्जा से भरा माना जाता है। इसलिए इस दौरान किये गये अशुभ कार्यों का प्रभाव लम्बे समय तक रहता है।

होलाष्टक कब व कहां लगता है
होलिका दहन के आठ दिन पहले विपाशा, इरावती, सूत्तुद्री, त्रिपुष्कर इन चारों नदियों के तटवर्ती भूभाग (नदी की भूमि) में विवाहादिक शुभ कार्य वर्जित हैं। अतः हिमाचल प्रदेश, असम, पंजाब में शुभ कार्य करने की मनाही है। अतः तीनों प्रदेशों को छोड़कर सम्पूर्ण भारत में शुभकृत किया जा सकता है।

होलिकादहन व होली
दिनांक 02 मार्च 2026 को रात्रि पर्यन्त भद्रा होने से भद्रा पुच्छ में रात्रि 12 बजकर 50 मिनट से रात्रि 2 बजकर 02 मिनट के मध्य होलिका दहन किया जायेगा। इसके दूसरे दिन ग्रस्तोदित चन्द्र ग्रहण लग रहा है। इसी दिन ग्रहण के उपरान्त प्रदोषकाल में प्रतिपदा के होने से काशी में चतुःषष्टि यात्रा तथा दर्शन होगा तथा चौत्र कृष्ण प्रतिपदा दिन बुधवार दिनांक 04 मार्च 2026 को होली – वसन्तोत्सव मनाया जायेगा। इसके दूसरे दिन 3 मार्च 2026 को ग्रस्तोदित चंद्र ग्रहण लग रहा है।

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