
रोशन जायसवाल,
बलिया। पश्चिमी बंगाल के विधायक हरेराम सिंह जिंदगी मे बहुत उतार चढ़ाव देखें। उन्हे नहीं पता था कि एक लेटर उन्हें सफलता की उचाईयो तक ले जाएगा। वह दौर था 1971 और 1975 के बीच का, जब उन्हें पश्चिमी बंगाल के कोल फील्ड मे नौकरी मिली। इसके पीछे कहानी यह थी कि करीब 1965 में गरीबी का दंश झेल रहे हरेराम सिंह के पिता राधेश्याम सिंह गांव छोड़कर पश्चिमी बंगाल चले गए। नौकरी के लिये दर-दर भटकते रहे। चूंकि वे संत प्रवृति के थे और वे मंदिरों में भी आते जाते थे।
एक समय ऐसा भी आया जब एक कोल फील्ड के एक पंजाबी मालिक से राधेश्याम सिंह की मुलाकात हो गई। राधेश्याम के सामने सरदार ने एक बात रखी। कहा कि भगवान ने सबकुछ दिया है लेकिन संतान नहीं दिया है। राधेश्याम सिंह ने कहा कि ईश्वर की कृपा से आपको संतान प्राप्ति जरूर होगी। राधेश्याम की बात उस वक्त सत्य हुई जब सरदार के घर में एक पुत्र ने जन्म लिया। खुशी से झूमा सरदार राधेश्याम के पास पहुंचा और उन्हें अपनी कंपनी में नौकरी दी। इस दौरान राधेश्याम सिंह की घर उनके माताजी के नाम पर दौ सौ रूपये प्रतिमाह पंजाबी मालिक ने भेजना शुरू किया।
हरेराम सिंह के नाम पंजाबी मालिक का लेटर
एक समय ऐसा भी आया जब कंपनी के पंजाबी मालिक ने राधेश्याम सिंह से पूछा कि आप के घर में कौन कौन है। राधेश्याम सिंह ने कहा कि मेरा पुत्र है जो गांव में किसानी करता है और इस वक्त पढ़ाई कर रहा है। पंजाबी मालिक ने हरेराम सिंह को एक पत्र लिखा और अपनी कंपनी में नौकरी केे लिये बुलाया। उस वक्त हरेराम सिंह की उम्र करीब 20 वर्ष थी। नौकरी करते करते उन्होंनने एक मजदूर नेता के रूप में अपनी पहचान बनाई।
1998 में की केकेएससी की स्थापना
1998 में कोयला खदान श्रमिक कांग्रेस (केकेएससी) की स्थापना की और वे उसके महामंत्री बने और आज भी वह इस संगठन के महामंत्री के पद पर है। 2021 के पहले स्टर्म कोल फील्डस लिमिटेड ईसीएल से सेवानिवृत होने के बाद हरेराम सिंह बंगाल के जमुरिया विधानसभा से 2021 में चुनाव लड़े और पहली बार वे विधायक बने।
ममती बनर्जी ने एक बार फिर हरेराम सिंह पर जताया भरोसा
इस समय पश्चिमी बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर हरेराम सिंह पर भरोसा जताया और उनकी लोकप्रियता पर मुहर लगाते हुए उन्हें दोबारा टिकट दिया। हरेराम सिंह का जीवन संघर्ष और सफलता की प्रेरक कहानी है। बलिया जिले के मनियर कस्बे मे एक साधारण किसान परिवार में जन्में हरेराम सिंह स्व.राधेश्याम सिंह के पुत्र है। अपने पिता की बदौलत पश्चिमी बंगाल की राजनीति में अपनी पहचान बनाने वाले हरेराम सिंह इन दिनों राजनीतिक सुर्खियों में है।

