
बलिया। पूर्वांचल में बीते वर्ष में रोजाना लगभग नौ लड़कियां लापता हुई हैं। साल के 365 दिनों में यह संख्या 3251 की है। सबसे अधिक आजमगढ़ जिले में 962 तथा सबसे कम सोनभद्र में 33 मामले आए हैं। लापता होने वालों में ज्यादातर नाबालिग ही हैं। हालांकि पुलिस के प्रयास से इनमें से 2845 बरामद हो चुकी हैं। शेष 406 की खोजबीन अबभी जारी है।
बेटा या बेटी लापता हो जाएं तो घरवालों की नींद उड़ जाती है। मामला दर्ज होने पर खासकर नाबालिग लड़कियों के मामले में पुलिस पर भी दबाव बढ़ जाता है। पुलिस उन्हें ढूंढकर लाती भी है। लोकेशन प्रदेश से बाहर मिलने पर वहां जाने-आने में हजारों का खर्च आता है।
तत्काल मुकदमा दर्ज होती है कार्रवाई
एसपी ओमवीर सिंह ने बताया कि लड़कियों और महिलाओं के लापता होने के मामलों में तत्काल मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाती है। थानों की टीम उसका लोकेशन ट्रेस कर बरामद करती है। बाहर आने-जाने पर होने वाले खर्च के बदले विभाग की ओर भत्ता देने का प्रावधान है।
बच्चों को अच्छे बुरे की पहचान कराएं अभिभावक
डॉ. अनुराग भटनागर, मनोविज्ञान विभाग, टीडी कॉलेज बलिया ने बताया कि अभिभावकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। खासकर बेटियों के मामले में मां को चाहिए कि वह उनसे दोस्त की तरह बात करें। उनकी मनोदशा को समझे। सकारात्मक ढंग से उनकी निगरानी करें। उन्हें अच्छे-बुरे का ज्ञान कराएं। डराने-धमकाने या मारने-पीटने की बजाय बेटा-बेटियों के साथ खुलकर बात करें। फिल्म, वेबसीरीज, मोबाइल के दुरुपयोग आदि से किशोरावस्था में बच्चों का भटक जाना स्वभाविक है।

